चिंता को दें मात, कैसे ?

दोस्तों , जीवन में परेशानियाँ, दुविधाएँ और कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है, हम अपनी परोस्थितियों को अपने अनूकूल कर सकने में सक्षम नही हो पाते। आइये हम सभी कुछ बिंदु बिन्दुवत करते है जिससे आप परिस्थितियों को अपने अनुकूल कर सकते है और आप चिंता को भी सरलता से जीत सकते है।


1. चिंता का केवल एक ही उपाय है। वह है चिंतन। चिंता कभी न करें, सदैव चिंतन ही करें।
 
2. आने वाले कल के बोझ को अगर बीते हुए कल के बोझ के साथ आज के दिन उठाया जाये तो शक्तिशाली से शक्तिशाली व्यक्ति भी लड़खड़ा जायेगा, इसलिए दोस्तों वर्तमान में एक एक दिन जियें यानि की 'एक डे टाइट कम्पार्टमेंट में जीवन जियें'। भविष्य की चिंता में कभी न घुलें।
 
3. अगर आप के सामने कोई समस्या या बड़ी समस्या आये तो आप स्वयं से पूछे - 'यदि मैं अपनी समस्या नहीं सुलझा पाता, तो मेरे साथ बुरे से बुरा क्या हो सकता है?' और आवश्कता पड़ने पर उस बुरे से बुरे परिणामों के लिए मानसिक रूप से स्वयं को तैयार कर लें।
 
4. फिर शांत दिमाग से अपने सोचे, बुरे से बुरे परिणामों को सुधारने की कोशिश करें - जिन्हें स्वीकार करने के लिए आप पहले ही खुद को मानसिक रूप से तैयार कर चुके है।
 
5. खुद को समझाएं की आप स्वास्थ्य के सन्दर्भ में चिंता की कितनी ज़्यादा कीमत चुका रहें है। चिंता वास्तव में उस बीमारी के समान होती है जो युवावस्था में ही मार देती है।
 
6. दोस्तों, समस्या को सुलझाने के लिए 3 चरण आवश्यक है। तथ्य इकठ्ठे करिये। तथ्यों का विश्लेषण करिये और फिर निर्णय के अनुसार कार्य करिये।
 
7. जो हो गया, उसे स्वीकारे और जो होना तय है, उसे सहजता से सामना करने का प्रयास करें।
 
8. आप अपने दिमाग को व्यस्त रख कर चिंता के व्यूह से निकल सकते है। कार्यों में लगे रहना चिंता का उत्तम उपचार है।
 
9. छोटी-छोटी बातों का बतंगड़ न बनायें। छोटी-छोटी चीज़ो, यानि की जीवन के दीमकों को अपनी ख़ुशी बर्बाद न करने दें।
 
10.अवश्यम्भावी के साथ सहयोग करें। अगर आप जानते है कि किसी परिस्थिति को बदलना या सुधारना संभव नही है तो स्वयं से कहें, यह हो चुकी है। यह बदल नही सकती।
 
11.अपनी चिंताओं पर स्टॉप लॉस आर्डर लगा दें। यह फैसला करें कि आप को चिंतन स्वरुप मूर्त रूप क्या देना है?
 
12.अतीत को दफ़न कर दें। आरी से बुरादा न चीरें।

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