अटल बिहारी वाजपेयी : राजनीति, मानवता और कविता का संगम
अटल बिहारी वाजपेयी : राजनीति, मानवता और कविता का संगम अटल बिहारी वाजपेयी जी ने राजनीति के शिखर पर पहुँचकर भी अपने जीवन के मानवीय मूल्यों को कभी स्वयं से दूर नहीं किया। वे केवल एक प्रभावशाली और प्रगतिशील राजनेता ही नहीं थे, बल्कि एक संवेदनशील, नेक इंसान और महान कवि भी थे। उनकी प्रसिद्ध काव्य पंक्तियाँ — “हार नहीं मानूँगा, रार नहीं ठानूँगा” और “काल के कपाल पर लिखता ही जाता हूँ” आज भी करोड़ों लोगों को संघर्ष, धैर्य और आत्मविश्वास की प्रेरणा देती हैं। इस लेख के माध्यम से हम अटल जी के जीवन के कुछ अनछुए, मानवीय और प्रेरणादायक पहलुओं को उजागर करने का प्रयास कर रहे हैं। 👤 जीवन परिचय पूरा नाम: अटल बिहारी वाजपेयी जन्म: 25 दिसंबर 1924, ग्वालियर (मध्य प्रदेश) पिता: श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी माता: श्री कृष्णा देवी शिक्षा: राजनीति शास्त्र में स्नातकोत्तर 🏛️ राजनीतिक सफर अटल बिहारी वाजपेयी जी पहली बार 1957 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र से सांसद चुने गए। वे भारत की राजनीति के उन दुर्लभ नेताओं में से थे, जो— चौथी, पाँचवीं, छठी, सातवीं, दसवीं, ग्यारहवीं, बारहवीं, तेरहवीं और चौदहवीं...