कॉकरोच नहीं, हमारी प्रतिक्रिया समस्या होती है.
एक रेस्टोरेंट में अचानक एक कॉकरोच उड़ता हुआ आया और पास बैठी एक महिला की कलाई पर जा बैठा।
महिला घबरा गई।
वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्लाने लगी, उछलने लगी और इधर-उधर हाथ मारने लगी—
“कॉकरोच… कॉकरोच…!”
उसकी घबराहट देखकर उसके साथ बैठे लोग भी डर गए।
माहौल में एक पल में अफरा-तफरी फैल गई।
डर का संक्रमण
हड़बड़ी में महिला ने तेज़ी से हाथ झटका और कॉकरोच उड़कर पास बैठी दूसरी महिला के ऊपर जा गिरा।
अब दूसरी महिला चिल्लाने लगी।
कुछ ही सेकंड में पूरा रेस्टोरेंट चीख-पुकार और घबराहट से भर गया।
एक अलग प्रतिक्रिया
थोड़ी दूरी पर खड़ा एक वेटर यह सब देख रहा था।
वह मदद के लिए आगे बढ़ा ही था कि तभी कॉकरोच उड़कर उसके कंधे पर बैठ गया।
लेकिन—
वेटर न तो चिल्लाया,
न घबराया,
न ही इधर-उधर भागा।
वह बिल्कुल शांत खड़ा रहा।
उसने ध्यान से कॉकरोच की हरकतों को देखा, सही समय का इंतज़ार किया और पास रखे नैपकिन से उसे पकड़कर आराम से बाहर फेंक दिया।
असली सवाल
मैं यह सब पास बैठकर देख रहा था।
और तभी मेरे मन में एक सवाल उठा—
क्या सच में सारी परेशानी का कारण वह कॉकरोच था?
अगर हाँ,
तो फिर वेटर क्यों नहीं घबराया?
वह भी तो बिल्कुल उसी स्थिति में था।
तभी एक गहरी बात समझ में आई—
समस्या क्या है?
समस्या कॉकरोच नहीं था।
समस्या थी उस स्थिति को संभाल न पाने की क्षमता।
असल में हमें परेशान—
माता-पिता की डांट नहीं करती
बॉस की कड़वी बातें नहीं करती
किसी का ऊँची आवाज़ में बोलना नहीं करता
हमें परेशान करता है
उन परिस्थितियों पर हमारा तुरंत, बिना सोचे-समझे दिया गया रिएक्शन।
ज़िंदगी के छोटे-छोटे उदाहरण
ट्रैफिक जाम भी हमें इसलिए नहीं सताता
कि सड़क पर गाड़ियाँ रुकी हैं,
बल्कि इसलिए सताता है
क्योंकि हम उस स्थिति को शांत मन से संभाल नहीं पाते।
यानी जीवन में दुख का असली कारण
समस्याएँ नहीं होतीं,
बल्कि उन पर हमारी प्रतिक्रिया होती है।
रिएक्शन बनाम रिस्पॉन्स
महिलाओं ने कॉकरोच को देखकर रिएक्ट किया
– डर, घबराहट और अफरा-तफरी के साथ
वहीं वेटर ने रिस्पॉन्ड किया
– शांत दिमाग, धैर्य और समझदारी के साथ
रिएक्शन अचानक होता है,
भावनाओं से भरा होता है।
रिस्पॉन्स सोच-समझकर दिया जाता है,
और वही हमें मजबूत बनाता है।
सीख
अगर हम ज़िंदगी में हर परिस्थिति पर
रुककर, सोचकर और शांत मन से जवाब देना सीख लें—
तो आधी समस्याएँ अपने-आप छोटी हो जाएँगी।
क्योंकि
👉 ज़िंदगी हमें क्या देती है, यह हमारे हाथ में नहीं होता
👉 लेकिन हम उस पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं, यह पूरी तरह हमारे हाथ में होता है
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