“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”

🔥 उठो, जागो और लक्ष्य तक पहुँचो – स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा

स्वामी विवेकानंद जी केवल एक संत नहीं थे, वे युवाओं के  आत्मविश्वास की आवाज़ थे। उनका मानना था कि हर इंसान के भीतर असीम शक्ति छुपी होती है, बस उसे पहचानने की ज़रूरत है।

वे कहते थे —

“उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक ल


क्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”

यह वाक्य सिर्फ शब्द नहीं, बल्कि जीवन जीने की रणनीति है।

💪 खुद पर विश्वास ही सबसे बड़ी शक्ति

स्वामी विवेकानंद जी का कहना था कि:

“जो स्वयं पर विश्वास नहीं करता, वह ईश्वर पर भी विश्वास नहीं कर सकता।”

जब आप खुद को कमजोर समझते हैं, तब आपकी शक्ति भी कमजोर पड़ जाती है। लेकिन जैसे ही आप अपने ऊपर विश्वास करना शुरू करते हैं, असंभव भी संभव बन जाता है।

🌱 असफलता से डरना मत

विवेकानंद जी मानते थे कि:

“एक बार असफल होना कोई हार नहीं है, बार-बार प्रयास न करना ही असली हार है।”

हर असफलता हमें कुछ न कुछ सिखाने आती है। जो गिरकर उठना सीख लेता है, वही जीवन में आगे बढ़ता है।

🔥 युवा शक्ति ही राष्ट्र की रीढ़

वे युवाओं से कहते थे:

“मुझे कुछ ऐसे युवा दो, जो मजबूत हों, चरित्रवान हों, और निडर हों — मैं राष्ट्र का निर्माण कर दूँगा।”

युवाओं के अंदर अगर आत्मबल, अनुशासन और लक्ष्य हो, तो कोई भी देश दुनिया की शक्ति बन सकता है।

✨ आज के जीवन के लिए संदेश

आज के समय में जब डर, भ्रम और असमंजस हर कदम पर हैं, स्वामी विवेकानंद जी का संदेश और भी प्रासंगिक है:

डर को त्यागो


आलस्य को छोड़ो

अपने लक्ष्य को पहचानो

और पूरे साहस के साथ आगे बढ़ो

🌟 निष्कर्ष

स्वामी विवेकानंद जी हमें सिखाते हैं कि बाहर शक्ति ढूँढने की ज़रूरत नहीं, क्योंकि शक्ति हमारे भीतर ही है।

👉 आप कमजोर नहीं हैं, आपने खुद को कमजोर मान लिया है।

👉 आज ही खुद पर विश्वास करना शुरू कीजिए — यही सच्ची साधना है।

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