महात्मा बुद्ध के प्रेरक कथन





  • आप को जो कुछ भी प्राप्त हुआ है, उसका अधिक मूल्यांकन न करें और न ही दूसरों से द्वेष, ईर्ष्या करें। द्वेष और ईर्ष्या मन की अशांति का कारण होती है।



  • घृणा, घृणा करने से कम नहीं होती, बल्कि प्रेम करने से घटती है, यही जीवन का शाश्वत नियम है।



  • मोह का त्याग अपने सफल सोपान की तरफ पहला पद है।



  • स्वास्थ्य, ईश्वर का सबसे महान उपहार है, और संतोष ही सबसे बड़ा धन तथा विश्वसनीयता जीवन का सबसे अच्छा संबंध है।



  • गुस्से में रहना, किसी दूसरों पर फेंकने के इरादे से एक गर्म कोयला अपने हाथ में रखने की तरह ही है, जो स्वयं को ही जलती रहती है।


 
  • आप कितने भी पवित्र से पवित्र शब्दों को पड़ें या बोलें, लेकिन जब तक उन पर आप अमल नहीं कर लेते, तब तक उसका कोई लाभ नहीं होता।



  • मनुष्य का मस्तिष्क ही मूल है, जो वह विचार करता है, वही वह बन जाता है।



  • जिह्वा एक तेज चाकू की तरह ही बिना रक्त निकाले ही मार सकती है।



  • सत्य के रास्ते पर दो ही गलतियाँ हो सकती हैं, या तो आप पूरा सफ़र नहीं कर पाते या सफ़र का आरम्भ नहीं कर पाते।



  • करोणों दीप को एक ही दीप से, उसके प्रकाश को बिना कम किये ही जलाया जा सकता है। ख़ुशियाँ और सफलता का आनंद बांटने से ख़ुशियाँ कभी कम नहीं होती है।



  • तीन वस्तुओं को अधिक लम्बी अवधि तक नहीं छुपाया जा सकता, वह हैं- सूर्य, चन्द्रमा और सत्य।



  • शरीर को स्वस्थ, और मजबूत रखना हमारा परम कर्त्तव्य है, इसके अभाव में, हम अपने दिमाग को मजबूत एवं स्वस्थ नहीं रख सकते।



  • हम अपने स्वयं के विचारों से ही अच्छी तरह तराशे जातें हैं, हम वही बन जातें हैं, जो हम विचारतें हैं जब मन पवित्र और क्लेश द्वेष से मुक्त होता है, तो आनंद छाया की तरह हमेशा हमार साथ देती है।



  • स्वयं के उद्धार के लिए, स्वयं कार्य करें। दूसरों पर निर्भर आपकी जड़ता कहलाएगी।


  • बूंद-बूंद से ही सागर बनता है।


  • सभी गलत कृत्य मन के द्वारा ही उपजाते हैं। अगर मन को जीत लिया जाए तो, कोई गलत कार्य नहीं रह सकता है।


  • निष्ठाहीन और बुरे मित्र से जानवरों की अपेक्षा ज्यादा चैतन्य होना चाहिए, क्योंकि एक जंगली जानवर सिर्फ आपके शरीर को ही घाव दे सकता है, लेकिन गलत संगति में एक बुरा मित्र आपके दिमाग पर चोट करता है।


  • हजार प्रभावहीन शब्दों से एक शब्द बेहतर है जो शांति प्रदान करता है।


  • अराजकता सभी जटिल सामाजिक बातों में निहित है। जीवन में परिश्रम के साथ प्रयास करते रहें।



  • भूतकाल पर ध्यान केन्द्रित न करें, वर्तमान क्षण पर ही ध्यान केंद्रित करें।


 

टिप्पणियाँ