सुकरात के प्रेरक कथन


  • हमारी विनतियां और प्रार्थनायें सामान्य रूप से केवल आशीर्वाद के लिए ही होनी चाहिए, क्योंकि ईश्वर सब जानते हैं कि हमारे लिए क्या अच्छा है और क्या नहीं अच्छा है। 






  • प्रत्येक मनुष्य की आत्मा अमर होती है, परन्तु जो मनुष्य नेक होते हैं, उनकी आत्मा दिव्य, तेज और अमर होती है।







  • आलस्य में जीवन व्यतीत करना आत्महत्या के समान ही है।







  • दोस्ती करने में धीमे रहिये, परन्तु जब कर लीजिये तो उसे मजबूती से निभाइए और उस पर स्थिर और अडिग रहिये।






  • चाहे जो हो जाये शादी कीजिये। अगर अच्छी पत्नी मिली तो आपकी ज़िन्दगी खुशहाल हो जाएगी, अगर बुरी पत्नी मिलेगी तो आप दार्शनिक ही बन जायेंगे।






  • जीवनभर ज्ञानार्जन के बाद मैं इस संसार में केवल इतना ही जान पाया हूं, कि मैं आज तक कुछ भी नहीं जान पाया हूं।






  • जहाँ सम्मान है वहीं डर है, पर ऐसी हर जगह सम्मान नहीं है जहाँ डर है, क्योंकि संभवतः डर अपने आप में सम्मान से ज्यादा व्यापक हो जाता है।




 

  • ज्यादातर आपकी गहन इच्छाओं से घोर नफरत पैदा होती है।




  

  • एक ईमानदार आदमी सदैव एक बच्चा ही होता है।




              

  • मृत्यु संभवतः मानवीय वरदानो में सबसे ज्यादा महान है।




                 

  • सौंदर्य जीवन का एक अल्पकालिक अत्याचार है।




  

  • जीवन नहीं, बल्कि एक अच्छी जीवन को महत्ता देनी चाहिए।




      

  • मूल्यहीन व्यक्ति केवल खाने और पीने के लिए ही जीते हैं; मूल्यवान व्यक्ति केवल जीने मात्र के लिए खाते और पीते हैं।




          
           

  • मैं सभी जीवित प्राणियों में सबसे बुद्धिमान हूँ, क्योंकि मैं ये जानता हूँ कि मैं इस विश्व में कुछ नहीं जानता हूँ।




            

  • इस विश्व में सम्मान से जीने का सबसे अच्छा और महान तरीका है कि हम वो बनें जो हम होने का ज्यादातर दिखावा करते हैं।




            

  • जहाँ तक मेरा मानना है कि मैं बस इतना जानता हूँ कि मैं कुछ नहीं जानता।




        

  • अपना अमूल्य समय औरों के लेखों से खुद को सुधारने में लगाइए, ताकि आप उन चीजों को आसानी से जान पाएं जिसके लिए औरों ने कठिन मेहनत की है और कड़ी मेहनत के बाद उस लेख का आकर दिया।  




          

  • झूठे शब्द केवल स्वयं में ही बुरे नहीं होते,बल्कि वो आपकी आत्मा को भी बुराई से भी संक्रमित कर देते हैं।   



        





  • सिर्फ जीवन व्यतीत करना मायने नहीं रखता बल्कि सच्चाई से जीना मायने रखता है।




            

  • वो सबसे धनवान है जो कम से कम में संतुष्ट है, क्योंकि संतुष्टि प्रकृति कि श्रेष्ठ और अद्भुत दौलत है।




             

  • सच्चा ज्ञान वास्तव में केवल यह जानने में है की आप कुछ नहीं जानते है।




   

  • बुद्धि आश्चर्य ( के साथ ) में शुरू होती है।




       

  • बिना जांचे हुए जीवन का कोई भी मूल्य नहीं है।






  • ना मैं एथेनियन और न ही एक ग्रीक, बल्कि मैं विश्व का एक सामान्य नागरिक हूँ।




     

  • वो दूसरों के साथ कभी भी ना करें, जो यदि दूसरा आप के साथ करे तो आपको क्रोध आ जाये।




 

  • प्रत्येक कार्य की अपनी ख़ुशी और अपना अपना मूल्य होता हैं।






  • केवल एक मात्र अच्छाई है ज्ञान और एक बुराई है अज्ञान।




            

  • स्वयं को समझने के लिए स्वयं के बारे में ही सोचें।






  • मजबूत दिमाग वाले विचारों पर, साधारण दिमाग वाले घटनाओं पर जबकि निम्न दिमाग वाले लोगों पर चर्चा किया करते हैं।




         

  • शिक्षा एक लौ जलाने के समान है, नाकि एक बड़ा बर्तन भरने के समान।






  • हम उस बालक को आसानी से क्षमा कर सकते है जो की अँधेरे से डरता है; लेकिन जीवन की वास्तविक त्रासदी तब है जब आदमी प्रकाश से डरने लग जाए।






  • जीवन में ईर्ष्या आत्मा का अल्सर है।






  • किसी प्रश्न को समझ लेना आधा उत्तर है।






  • व्यस्त ज़िन्दगी की दरिद्रता से सदैव सावधान रहें।






  • किसी से भी मिलते आप वक़्त आवशयकता से अधिक अच्छे रहें।  प्रत्येक व्यक्ति किसी ना किसी प्रकार का युद्ध लड़ रहा है।






  • जीने मात्र के लिए खाना चाहिए ना की खाने के लिए ही जीना चाहिए।







  • यदि आप एक अच्छे काठ साज़ बनना चाहते है तो सबसे खराब घोड़े की काठ बनाए ; यदि आप ने उस एक को वश में कर लिया तो आप सदैव सब को वश में कर सकते है।






  • सबसे आसान, अच्छा और विनम्र तरीका यह है की आप दूसरों को कुचले नहीं बल्कि स्वयं में सुधार करें।







  • संसार को चलाने के लिए पहले हमें स्वयं को खूब चलना होगा।






  • मस्तिष्क ही सब कुछ है; आप जो सोचते है वो ही बन जाते हैं






  • एक गलत विचार का समर्थन जारी रखने से कहीं अच्छा है, आप अपनी राय तुरंत बदल लें।






  • जीवन में ख़ुशी का रहस्य ज्यादा पाने में नहीं, बल्कि थोड़े का आनंद लेने की क्षमता विकसित करने में ही है।






  • मैं किसी को भी कुछ भी नहीं सीखा सकता हूँ, मैं उन्हें केवल सोचने लायक ही बना सकता हूँ।




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