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अल्बर्ट आंस्टिन के प्रेरक कथन
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जीवन जीने के दो तरीके है। पहला यह कि इस संसार में कुछ भी चमत्कार नहीं है, दूसरा यह कि दुनिया चमत्कारों से भरा है।
दो चीजें इस ब्रह्माण्ड में अनंत हैं:पहला- ब्रह्माण्ड और दूसरा मनुष्य कि मूर्खता; और मैं ब्रह्माण्ड के बारे में उतनी दृढ़ता से नहीं कह सकता।
जिस व्यक्ति ने कभी गलती ही नहीं की, उसने जीवन में कभी कुछ नया करने की कोशिश ही नहीं की।
प्रत्येक मनुष्य जीनियस है। लेकिन यदि आप किसी मछली को उसकी पेड़ पर चढ़ने की योग्यता से निर्णय करेंगे तो वो अपनी पूरी ज़िन्दगी यह सोच कर जी जायेगी की वो मुर्ख है।
एक सफल व्यक्ति बनने का प्रयास न करें। बल्कि सिद्धान्तवादी इंसान बने।
ईश्वर के सम्मुख हम सभी एक बराबर ही बुद्धिमान प्राणी हैं-और एक बराबर ही मूर्ख भी हैं।
अनुपात में अच्छा और बुरा का अनुभव, यही सापेक्षता का सिद्धान्त है।
यदि आप प्रसन्नतापूर्वक जीवन जीना चाहते हैं, तो स्वयं को एक व्यक्ति या वस्तु के बजाय एक लक्ष्य से बांधे।
अपनी सबसे अच्छी क्षमताओं के अनुसार, राजनितिक मामलो में दोषसिद्धि, हर नागरिक का कर्तव्य है।
संयोग ईश्वर का बचा हुआ, गोपनीय पथ है।
क्रोध मूर्खों की सीने में ही बसा होता है।
बुद्धि का संकेतन ज्ञान नहीं बल्कि उच्च कल्पनाशीलता है।
यदि मानव जीवन को विकसित और जीवित रखना है, तो हमें बिलकुल नयी-नयी सोच , कल्पना की आवश्यकता होगी।
तार्किक योग्यता आपको एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाएगी, कल्पनाशीलता आपको कहीं भी ले जा सकती है।
मनुष्य को यह देखना चाहिए कि क्या है, यह नहीं कि उसके अनुसार क्या होना चाहिए।
जिंदगी में एक मेज, एक कुर्सी, एक कटोरा फल और एक वायलन ; भला खुश रहने के लिए और क्या क्या चाहिए?
सूचना ज्ञान की श्रेणी में नहीं है।
कोई भी समस्या चेतना के उसी स्तर पर रह कर नहीं हल की जा सकती है जिस स्तर पर वह उत्पन्न हुई है। उससे असली पहलुओं को जानने के लिए, उसके स्तर से ऊपर जाना होगा।
शांति जबरदस्ती जोर डालकर प्राप्त नहीं की जा सकती, सिर्फ क्या और क्यों का उत्तर प्राप्त कर के की जा सकती है।
जीवन में असली जोखिम से ही विश्वास और आस्था की पहचान होती है।
परेशानियां अवसरवादी होतीं है, इन्ही के मध्य ही अवसर छिपा होता है।
कल्पना का स्तर ज्ञान के स्तर से कहीं ऊपर होता है। इसलिए ज्ञान से ज्यादा आवश्यक कल्पना है।
अगर तथ्य सिद्धांत से सामंजस्य स्थापित नही हो पाता तो तथ्य को बदल डालें।
सवाल के आभाव में, किसी अधिकृत मानव का सम्मान करना सत्य के खिलाफ है।
खुद को सच और ज्ञान का न्यायाधीश समझने वालों का ये मिथ्या विश्वास ईश्वर ही खंडित करते है।
सच्चा धर्म ही सच्चा जीवन है, अपनी पूरी आत्मा के साथ जीवन जीना, सारी अच्छाई और पूरी उदारता ही सच्चा धर्म है।
मै स्वर्ग और नर्क में से किसी को भी अच्छा या बुरा नहीं कह सकता क्योंकि, मेरे दोस्त दोनों ही स्थानों रहा करतें है।
मेरे पास किसी भी प्रकार की कोई विशेष काबिलियत नहीं है, मै तो बस जिज्ञासु जीव हूँ।
ये विश्व बहुत ही भयानक है, उन व्यक्तियों के कारण नहीं जो बुरा करते है बल्कि उन व्यक्तियों के कारण जो बुरा होते देखते है और लगातार बुरा होने देते रहतें है।
शिक्षा वह है जो आपको तब भी याद रहे जब आप सब कुछ पूर्ण रूप भूल से गए हो जो आपको याद था।
सत्य और ज्ञान की खोज में लगे रहना और जिज्ञासु प्रवृत्ति ही किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी विशेषता और महानता हो सकती है।
समय मनुष्य से ज्यादा मजबूत होतीे है, और यही सबसे बड़ी दवा भी है।
हिंसा हमेशा बाधा को जल्दी से हटा तो सकती है पर ये कभी सृजनात्मक और स्थायी नहीं हो सकती।
वक्त बहुत कम है अगर हमे जीवन में कुछ करना है तो प्रयास अभी से शुरू कर देना चाहिए।
व्यक्तित्व सुनने या देखने से नहीं बनता बल्कि मेहनत और लगातार निष्ठापूर्ण काम करने से बनता है।
मानव की कीमत इससे नहीं है कि वो क्या प्राप्त कर सकता है, बल्कि इसमें है कि वो त्याग कर क्या दे सकता है।
भय शांति का मूल नही। शांति तो तब ही आती है जब हम आपसी विश्वास के लिए ईमानदारी से लगातार प्रयास करतें रहतें हैं।
न्यूटन सर के बारे में सोचने का अर्थ है उनके महान कार्यो को याद करना। उनके जैसे महान व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में इसी से अंदेशा लगाया जा सकता है कि उन्हें जीवन में एक सर्वव्यापी सत्य को सिद्ध करने में कितना संघर्ष करना पड़ा।
आपको खेल के नियम सीखने चाहिए। और तब ही आप किसी भी खिलाडी से अच्छा खेल सकेंगे।
बीते हुए कल से सीखते रहना, आज में जीना, कल के लिए आशा रखना। और सबसे महत्तवपूर्ण चीज़ है, प्रश्न पूंछना मत बंद करना।
शांति शक्ति के द्वारा नहीं लायी जा सकती है। यह तो केवल समझ से ही प्राप्त की जा सकती है।
हम अपनी समस्याओं को उसी सोच के साथ समाप्त नहीं कर सकते है, जिस सोच के साथ हमने उन्हें पैदा किया था।
मूर्खता और बुद्धिमता में यह अंतर है की बुद्धिमता की एक सीमा निर्धारित होती है।
पागलपन : एक ही चीज़ को बार-बार करना और हमेशा अलग परिणाम की आशा करते रहना।
लोग कहते है की वो मष्तिष्क ही है जो एक महान वैज्ञानिक बनाती है। वे गलत हैं, चरित्र एक महान वैज्ञानिक बनती है ना की दिमाग।
यदि आपके अंदर किसी कठिन चीज़ को आसानी से, साधारण तरीके से बताने की क्षमता नही आती तो इसका अर्थ है आप उसको सही ढंग से नहीं समझ पाएं हैं।
धर्म के आभाव में विज्ञान लंगड़ा है और विज्ञान के अभाव में धर्म अंधा है।
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