समाज में शिक्षकों की भूमिका ( शिक्षक दिवस पर विशेष)





सर्वपल्ली राधाकृष्णन
(भारत के दूसरे राष्ट्रपति)
जन्म : 5  सितम्बर 1888, तिरुत्तनि (चेन्नई से ६४ किमी उत्तर-पूर्व)
राजनैतिक पार्टी : स्वतन्त्र
जीवन संगी   :  शिवकामु
व्यवसाय   : राजनीतिज्ञ, दार्शनिक, शिक्षाविद, विचारक
देहावसान : 17 अप्रैल 1975 



प्रसिद्ध कथन 


  •  "मानव की जाति एक होनी चाहिये। मानव इतिहास का सम्पूर्ण लक्ष्य मानव जाति की मुक्ति है। यह तभी सम्भव है जब समस्त देशों की नीतियों का आधार विश्व-शान्ति की स्थापना का प्रयत्न करना हो।"





  • "मात्र जानकारियाँ देना शिक्षा नहीं है। यद्यपि जानकारी का अपना महत्व है और आधुनिक युग में तकनीक की जानकारी महत्वपूर्ण भी है तथापि व्यक्ति के बौद्धिक झुकाव और उसकी लोकतान्त्रिक भावना का भी बड़ा महत्व है। ये बातें व्यक्ति को एक उत्तरदायी नागरिक बनाती हैं। शिक्षा का लक्ष्य है ज्ञान के प्रति समर्पण की भावना और निरन्तर सीखते रहने की प्रवृत्ति। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्ति को ज्ञान और कौशल दोनों प्रदान करती है तथा इनका जीवन में उपयोग करने का मार्ग प्रशस्त करती है। करुणा, प्रेम और श्रेष्ठ परम्पराओं का विकास भी शिक्षा के उद्देश्य हैं।"




  • "जब तक शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित और प्रतिबद्ध नहीं होता और शिक्षा को एक मिशन नहीं मानता तब तक अच्छी शिक्षा की कल्पना नहीं की जा सकती।"



  • शिक्षक उन्हीं लोगों को बनाया जाना चाहिये जो सबसे अधिक बुद्धिमान हों। शिक्षक को मात्र अच्छी तरह अध्यापन करके ही सन्तुष्ट नहीं हो जाना चाहिये अपितु उसे अपने छात्रों का स्नेह और आदर भी अर्जित करना चाहिये। सम्मान शिक्षक होने भर से नहीं मिलता, उसे अर्जित करना पड़ता है।



  • मेरे जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाने से निश्चय ही मैं अपने को गौरवान्वित अनुभव करूँगा





महर्षि अरविन्द ने शिक्षकों के सम्बन्ध में कहा है कि_" शिक्षक राष्ट् की संस्कृति के चतुरमाली होते है । वे संस्कारों की जड़ो में खाद देते है और अपने श्रम से सींचकर उन्हें शक्ति में निर्मित करते है ।
   उनका मानना था कि किसी राष्ट् के वास्तविक निर्माता वहाँ के शिक्षक होते है। इस प्रकार एक विकसित समृद्ध और खुशहाल देश व विश्व के निर्माण में शिक्षकों की भूमिका ही सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।
            एक अच्छा शिल्पकार किसी भी प्रकार के पत्थर को तराशकर उसे सुन्दर आकृति का रूप दे देता है । किसी भी सुंदर मूर्ति को तराशने में शिल्पकार की बहुत बड़ी भूमिका होती है । इसी प्रकार एक कुम्हार गीली मिट्टी को नया  आकार दे देता है , ठीक उसी प्रकार  समाज को नया रूप देने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है । 
            शिक्षक समाज का वास्तविक शिल्पकार होता है, जो समाज की आवश्यकता के अनुरूप उन्हें नया रूप देकर समाज की नीव को मजबूत करता है। एक कुशल शिक्षक हमारे समाज की आधारशिला होता है जो न जाने हमारे समाज को कितने डॉक्टर, इंजीनियर, आईएस, वैज्ञानिक इत्यादि देता है ।
              बालक के जीवन को सफल बनाने की आधारशिला शिक्षक को बचपन में ही रखनी चाहिए । उद्देश्यपूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही एक सुन्दर एवं सभ्य समाज का निर्माण संभव है । शिक्षक स्वम जल कर विश्व को प्रकाशित करता है।
इसलिए इनके सम्बन्ध में कहा गया है कि _
    "शिक्षक उस मोमबत्ती की भाँति होते है जो स्वम् जलकर दूसरों को प्रकाश देती है ।"



समाज को अनमोल रत्न प्रदान करने  वाले ऐसे शिक्षक को बारम्बार प्रणाम है
। शिक्षक दिवस( 5 सितंबर ) पर  विश्व के सभी शिक्षकों को हार्दिक शुभकामनाएं


भारत की तरह ही अन्य देशों में विभिन्न दिवस पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है आइये जानतें है अन्य देशों के शिक्षक दिवस

देश और उनके शिक्षक दिवस

अर्जेन्टीना :11 सितम्बर 
   अल्बानिया : 7 मार्च
ऑस्ट्रेलिया :अक्टूबर मास की अंतिम शुक्रवार
ब्राज़ील :15अक्टूबर    
चिली :16 अक्टूबर    
चीन :10 सितम्बर.
चेक गणराज्य : 28 मार्च .
इक्वाडोर :13अप्रैल      
अल साल्वाडोर :22 जून
हांग कांग :12सितम्बर   
हंगरी : जून की पहले शनिवार
भारत : 5सितम्बर  
इंडोनेशिया : 25 नवम्बर    
ईरान : 2मई
मलेशिया 16 मई   
मेक्सिको 15मई
मंगोलिया : फरवरी के पहले सप्ताह          
पाकिस्तान : 4अक्टूबर      .
पेरू : 6 जुलाई
 फ़िलीपीन्स : 5अक्टूबर     
 पोलैंड : 14अक्टूबर    
रूस :5 अक्टूबर     
सिंगापुर :1सितम्बर     
दक्षिण कोरिया : 15मई
ताइवान :28 सितम्बर    .
 थाईलैंड  : 16जनवरी     
 तुर्की  : 24 नवम्बर    
संयुक्त राज्य अमेरिका : 6 मई
वियतनाम : 20 नवम्बर     










शिल्पी पाण्डेय
लखनऊ ( यू. पी.)




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