ज्ञान की सीख

ज्ञान की सीख


बहुत पहले की बात हैएक परिवार ने अपने बालक को पढाई के लिए आश्रम भेजाबालक गुरु के आश्रम में पहुँच गया,
उसने गुरुकुल में प्रवेश लिया और अध्ययन करने लगाउसे अध्ययन करते हुए एक साल बीत गये, पर उसको कुछ भी समझ में नही आया, जब उसकी परीक्षा हुई तो वह परीक्षा में फेल हो गया

गुरु जी ने उसे खूब समझायातुम मेहनत करो, तुम खूब मेहनत करो, तभी तुम ज्ञान प्राप्त कर पाओगेगुरु जी के कथनानुसार वह बालक पुनः पढने के लिए तैयार हो गयापुनः वह अध्ययन में लग गयाअध्ययन करते करते उसे एक साल फिर से बीत गये, लेकिन उसे एक अक्षर भी समझ में नहीं आयाकितना भी मेहनत करता लेकिन उसके समझ में कुछ भी नही आता और आने वाली परीक्षा में वह पुनः असफल रहा

मन से दुखी हो कर, वह घर की ओर चल पड़ा और अचानक रास्ते में उसके मन में विचार आया- एक बार जाने से पूर्व मैं गुरु जी से मिल लूंवह गुरु जी के आश्रम की ओर चल पड़ा

वहाँ पहुंच कर देखा गुरु जी ध्यान अवस्था में आसन पर बैठें हुए हैंउस बालक ने गुरु जी को प्रणाम करते हुए कहाहे! गुरुवर आप मुझे ऐसा मार्ग बताइए जिससे मैं ज्ञान अर्जन कर पाऊँमुझे सब समझ में आने लगे, मै किसी योग्य बन पाऊँयदि मैं मूढ़ हूँ, मैं सीखने योग्य नहीं हूँ तो आप ही बताइए, मै आश्रम छोड़ कर चला जाऊं कोई अन्य कार्य करूं

गुरु ने अपने नेत्र खोले और बालक की ओर देखते हुए कहाबालक इसका उत्तर मै तुम्हे कल दूंगातुम मुझे कल गंगा तट पर प्रातः 5 बजे मिलनाबालक उत्सुकता वश रुक गया और प्रातः का इंतज़ार करने लगाप्रातः होने पर वह ठीक 5 बजे गंगा तट पर पहुँच गयापहुँच कर उसने देखा कि गुरु जी गंगा जी में स्नान कर रहे है

जब गुरु जी ने उस बालक को देखा तो उसे इशारे से अपने पास बुला लिया और गंगा जी में उतरने को कहाबालक मन ही मन उत्सुक था ज़रूर गुरु जी चमत्कार करेंगेजब बालक गंगा जी में उतरा तो उसके कंधे तक पानी थातुरन्त ही गुरु जी ने उस बालक का केश पकड़ कर उसे गंगा जी में डुबो दियाकुछ समय तो उस बालक को कुछ समझ में ही नहीं आया कि गुरु जी उसके साथ ऐसा क्यों कर रहें हैंउसके नाक और मूंह से पानी शरीर में प्रवेश करने लगा और सांस रुकने लगी, वह छटपटाने लगा, मानो ऐसा लग रहा था कि उसके प्राण निकल जायेंगे उसे ऐसा लगा, अब तो मैं बच ही नहीं पाउँगागुरु ऐसा क्यों कर रहें हैं!

 तभी अचानक प्राण छूटने के पहले उसने अपने शरीर की सारी ताकत इकठ्ठा करके एक बहुत ज़ोर का बल ऊपर की ओर लगायाजैसे ही उस बालक ने ज़ोर का बल ऊपर की ओर लगाया तो गुरु का हाथ ढीला पड़ गयाबालक पानी से ऊपर गया और उसने जल्दी जल्दी सांसें लीं और किसी तरह भाग कर किनारे आयागुरु जी भी उसके पीछे पीछे बहार गयेगुरु को देख कर बालक बोला हे! गुरुवर आप हमारे गुरु हैं या शत्रु हैं आज तो आप हमारे प्राण ही हर लेते

गुरु ने उत्तर देते हुए कहा - नहीं पुत्र, कल जो तुमने प्रश्न पूछा था, मै आज उसका उत्तर दे रहा थाजिस प्रकार अपने प्राणों की रक्षा करने के लिए तुमने अपने भरपूर इच्छा शक्ति के माध्यम से जो बल लगाया और पानी से ऊपर कर अपने प्राणों की रक्षा की ठीक उसी प्रकार अपनी इच्छा शक्ति को एकत्र कर के पूरे मनोयोग से अध्ययन करोगे तो तुम जरूर ज्ञान अर्जन कर पाओगे

दोस्तों कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं होता यदि हमारी इच्छा शक्ति दृढ़ है और हम बहुत ही सुनियोजित ढंग से प्रयास करतें है, तो हम अपना लक्ष्य पा सकतें हैं
 सदैव सकारात्मक रहें, प्रयासरत रहें, क्यों कि Impossible says I am Possible.   

  

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