कन्फ्यूशियस के महान प्रेरक विचार

 चीन के महान दार्शनिक
जन्म - 550 ईसा पूर्व,  चीन  के शानदोंग प्रान्त में
शिक्षक - इतिहास, काव्य, नीतिशास्त्र
लेख - कुन्फ़्यूशियसी धर्म, सौ विचारधाराएँ, झोऊ राजवंश, बसंत और शरद काल , झगड़ते राज्यों का काल
मृत्यु - 480 ईसा पूर्व





  • एक महान मनुष्य कहने में कम, करने में अधिक विश्वास रखता हैं।




  • एक सिंह से अधिक एक दमनकारी सरकार से डरना चाहिए।




  • हर एक वस्तु में खूबसूरती होती है, परन्तु हर कोई उसे नहीं देख पाता, उसे अनुभव नहीं कर पाता।



  • मैं सुनकर भूल जाया करता  हूँ, मैं देखता हूँ और सदैव याद रखता हूँ,  मैं करता हूँ और स्वयं ही समझ जाता हूँ।




  • जो आप स्वयं नहीं पसंद करते, उसे दूसरों पर कभी मत थोपिए।



  • बुराई को देखना और सुनना ही बुराई करने का आरम्भ है।



  • सफलता पूर्व से की गयी तैयारी पर निर्भर है, और बिना ऐसी तैयारी के असफलता निश्चित है।



  • महानता कभी न गिरने में नहीं है, बल्कि निरंतर और हर बार गिरकर उठ जाने में है।



  • घृणा करना आसान है, प्रेम करना कठिन। चीजें इस तरह काम करती हैं कि सारी अच्छी चीजों को पाना कठिन होता है, और बुरी चीजें बहुत आसानी से मिल जाया करतीं हैं।




  • हम तीन तरह से ज्ञान अर्जित करतें हैं। पहला, चिंतन करके, जो कि सबसे सही तरीका है, दूसरा, अनुकरण करके ,जो कि सबसे सरल है,  और तीसरा अनुभव से, जो कि सबसे कष्टकारी है।



  • यह बात कभी मायने नहीं रखती, की आप कितने धीमे चल रहे हैं,  जब तक की आप रुकें नहीं।



  • बुद्धि, करुणा, और साहस यह तीन मनुष्य के लिए तीन महान और सार्वभौमिक मान्यता प्राप्त नैतिक गुण हैं।



  • किसी कमी के साथ एक हीरा बिना किसी कमी के पत्थर से कहीं बेहतर है।



  • उस कार्य का चयन कीजिये, जिसे आप पसंद करते हैं, फिर आप पूरा जीवन एक दिन भी काम नहीं करंगे।




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